सरस्वती महिला महाविद्यालय पलवल के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “राजनीति विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का संबंध” विषय पर डी जी एच ई अनुमोदित एक दिवसीय अंत:विषय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राजनीति विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के पारस्परिक संबंधों को समझना तथा सामाजिक, राजनीति एवं आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में इनके महत्त्व को रेखांकित करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अतुल मंगला, अतिरिक्त महाधिवक्ता, हरियाणा एवं प्रधान सरस्वती महिला महाविद्यालय, सम्मानित अतिथि मनीषा मंगला (निदेशिका सरस्वती महिला महाविद्यालय),वक्ता प्रोo राजेंद्र शर्मा ,(राजनीति विज्ञान विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) ,प्रोo (डॉ.) चारु माथुर, ए.आर.एस.डी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डॉ. स्मिता चौधरी, (डाइरेक्टर, एसोसिएशन फॉर सिविलाइजेशनल इंटरनेशनल रिलेशंस , अलीगढ़)महाविद्यालय प्राचार्या डॉo वंदना त्यागी ,राजनीतिक विभागाध्यक्ष व आयोजिका प्रो. डॉo रानी सांगवान, सहसंयोजिका डॉo रीना सिंह, मिस नीलम रानी और डॉo वर्षा द्वारा सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉo वंदना त्यागी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए आमंत्रित अतिथियों, विषय-विशेषज्ञों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियों को ज्ञान-विस्तार, शोध-अभिरुचि तथा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण बताया।संगोष्ठी की थीम प्रोo (डॉo) रानी सांगवान द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजनीति विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का अध्ययन समाज की संरचना, राजनीतिक संस्थाओं, सामाजिक संबंधों तथा परिवर्तन की प्रक्रियाओं को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उद्घाटन संबोधन में डॉ. राजेंद्र शर्मा ने अपने वक्तव्य में राजनीति विज्ञान के व्यापक स्वरूप तथा समाज के अन्य विषयों के साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोकतंत्र, नागरिकता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के अध्ययन में अंतर्विषयक दृष्टिकोण की उपयोगिता को रेखांकित किया।संगोष्ठी के मुख्य वक्तव्य में प्रोoडॉo चारु माथुर ने विषय से संबंधित अकादमिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने राजनीतिक एवं सामाजिक प्रक्रियाओं के पारस्परिक प्रभाव को समझने तथा विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के समन्वित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।इस अवसर पर डॉo स्मिता चौधरी, की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने बतलाया कि सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत मानव समाज, उसके व्यवहार, संस्थाओं और संबंधों का अध्ययन किया जाता है, और राजनीति विज्ञान उसी समाज के राजनीतिक एवं शासकीय पक्ष का अध्ययन करता है।प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या महोदया डॉo वन्दना त्यागी जी तथा इस सत्र में रिसोर्स पर्सन की भूमिका प्रोo डॉo राजबीर सिंह( जीजी डीएसडी, कॉलेज पलवल) के द्वारा निभाई गईlसेमिनार की दूसरे तकनीकी सत्र में अध्यक्षता प्रोoडॉo मोनिका गुप्ता (लॉ कॉलेज, पलवल) तथा प्रोo डॉo रानी संगवानी ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाईl ऑनलाइन सत्र में प्रोo डॉo ललिता ने अध्यक्षता तथा डॉo जगदीप ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाईlइन सत्रों में विभिन्न महाविद्यालय से प्रतिभागियों ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किएlसेमिनार में सभी अतिथियों, चेयरपर्सन, रिसोर्स पर्सन ने बताया कि राजनीति विज्ञान का सामाजिक विज्ञान के अन्य विषयों के साथ गहरा संबंध हैl समापन सत्र में मुख्य वक्ता की भूमिका प्रोo डॉo कुशल पाल, प्रिंसिपल (इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज, लाडवा, कुरुक्षेत्र) द्वारा निभाई गई इन्होंने अपने वक्तव्य में बतलाया कि वर्तमान समय की जटिल सामाजिक एवं राजनीतिक समस्याओं का समाधान केवल एक विषय के अध्ययन से संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के अंतर्विषयक दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है। इस प्रकार का अकादमिक विमर्श विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, शोध-अभिरुचि और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक होता है।सेमिनार में लगभग 150 सहायक प्रोफेसर वह शोधार्थियों ने भाग लिया lअतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर उनकी सराहना की गईl मिस नीलम रानी द्वारा सेमिनार रिपोर्ट की प्रस्तुति दी गईl समारोह के अंत में विभागाध्यक्ष प्रोo रानी सांगवान के द्वारा महाविद्यालय की मैनेजमेंट समिति,सभी अतिथियों स्टाफ सदस्यों,प्रतिभागियों, छात्राओं तथा मीडिया सदस्यों का धन्यवाद किया गया।राष्ट्रगान के स्वरों के साथ एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन किया गया
एक दिवसीय अंत:विषय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
सरस्वती महिला महाविद्यालय पलवल के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “राजनीति विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का संबंध” विषय पर डी जी एच ई अनुमोदित एक दिवसीय अंत:विषय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राजनीति विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के पारस्परिक संबंधों को समझना तथा सामाजिक, राजनीति एवं आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में इनके महत्त्व को रेखांकित करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अतुल मंगला, अतिरिक्त महाधिवक्ता, हरियाणा एवं प्रधान सरस्वती महिला महाविद्यालय, सम्मानित अतिथि मनीषा मंगला (निदेशिका सरस्वती महिला महाविद्यालय),वक्ता प्रोo राजेंद्र शर्मा ,(राजनीति विज्ञान विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) ,प्रोo (डॉ.) चारु माथुर, ए.आर.एस.डी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डॉ. स्मिता चौधरी, (डाइरेक्टर, एसोसिएशन फॉर सिविलाइजेशनल इंटरनेशनल रिलेशंस , अलीगढ़)महाविद्यालय प्राचार्या डॉo वंदना त्यागी ,राजनीतिक विभागाध्यक्ष व आयोजिका प्रो. डॉo रानी सांगवान, सहसंयोजिका डॉo रीना सिंह, मिस नीलम रानी और डॉo वर्षा द्वारा सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉo वंदना त्यागी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए आमंत्रित अतिथियों, विषय-विशेषज्ञों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियों को ज्ञान-विस्तार, शोध-अभिरुचि तथा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण बताया।संगोष्ठी की थीम प्रोo (डॉo) रानी सांगवान द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजनीति विज्ञान और सामाजिक विज्ञान का अध्ययन समाज की संरचना, राजनीतिक संस्थाओं, सामाजिक संबंधों तथा परिवर्तन की प्रक्रियाओं को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उद्घाटन संबोधन में डॉ. राजेंद्र शर्मा ने अपने वक्तव्य में राजनीति विज्ञान के व्यापक स्वरूप तथा समाज के अन्य विषयों के साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोकतंत्र, नागरिकता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के अध्ययन में अंतर्विषयक दृष्टिकोण की उपयोगिता को रेखांकित किया।संगोष्ठी के मुख्य वक्तव्य में प्रोoडॉo चारु माथुर ने विषय से संबंधित अकादमिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने राजनीतिक एवं सामाजिक प्रक्रियाओं के पारस्परिक प्रभाव को समझने तथा विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के समन्वित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।इस अवसर पर डॉo स्मिता चौधरी, की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने बतलाया कि सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत मानव समाज, उसके व्यवहार, संस्थाओं और संबंधों का अध्ययन किया जाता है, और राजनीति विज्ञान उसी समाज के राजनीतिक एवं शासकीय पक्ष का अध्ययन करता है।प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या महोदया डॉo वन्दना त्यागी जी तथा इस सत्र में रिसोर्स पर्सन की भूमिका प्रोo डॉo राजबीर सिंह( जीजी डीएसडी, कॉलेज पलवल) के द्वारा निभाई गईlसेमिनार की दूसरे तकनीकी सत्र में अध्यक्षता प्रोoडॉo मोनिका गुप्ता (लॉ कॉलेज, पलवल) तथा प्रोo डॉo रानी संगवानी ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाईl ऑनलाइन सत्र में प्रोo डॉo ललिता ने अध्यक्षता तथा डॉo जगदीप ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाईlइन सत्रों में विभिन्न महाविद्यालय से प्रतिभागियों ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किएlसेमिनार में सभी अतिथियों, चेयरपर्सन, रिसोर्स पर्सन ने बताया कि राजनीति विज्ञान का सामाजिक विज्ञान के अन्य विषयों के साथ गहरा संबंध हैl समापन सत्र में मुख्य वक्ता की भूमिका प्रोo डॉo कुशल पाल, प्रिंसिपल (इंदिरा गांधी नेशनल कॉलेज, लाडवा, कुरुक्षेत्र) द्वारा निभाई गई इन्होंने अपने वक्तव्य में बतलाया कि वर्तमान समय की जटिल सामाजिक एवं राजनीतिक समस्याओं का समाधान केवल एक विषय के अध्ययन से संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न सामाजिक विज्ञानों के अंतर्विषयक दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है। इस प्रकार का अकादमिक विमर्श विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, शोध-अभिरुचि और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक होता है।सेमिनार में लगभग 150 सहायक प्रोफेसर वह शोधार्थियों ने भाग लिया lअतिथियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर उनकी सराहना की गईl मिस नीलम रानी द्वारा सेमिनार रिपोर्ट की प्रस्तुति दी गईl समारोह के अंत में विभागाध्यक्ष प्रोo रानी सांगवान के द्वारा महाविद्यालय की मैनेजमेंट समिति,सभी अतिथियों स्टाफ सदस्यों,प्रतिभागियों, छात्राओं तथा मीडिया सदस्यों का धन्यवाद किया गया।राष्ट्रगान के स्वरों के साथ एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन किया गया
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