पलवल में पुलिस व प्रशासन द्वारा लगातार पलवल को नशा मुक्त बनाने के प्रयास में अपनों का ही सहयोग नहीं मिल पाने के कारण यह प्रयास पूरी तरह से सफ ल नहीं हो पा रहा है। जिला पुलिस अधिक्षक नितिश अग्रवाल द्वारा पलवल जिले को नशा मुक्त करने के लिए डीएसपी व थाना प्रभारियों की बैठक ले कर पलवल जिले को पूरी तरह से नशा मुक्त करने के आदेश प्रदान करने के बाद पलवल में पूरी तरह से अवैध शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग गई थी। लेकिन दुबारा से अचानक अवैध शराब विक्रेताओं के ऊपर से सख्ती कम होने पर अवैध शराब की बिक्री आरम्भ हो गई है। इसका मुख्य कारण पुलिस प्रशासन में छुपी हुई काली भेंडे हैं। इनके द्वारा अपने क्षेत्र में अवैध शराब विक्रेताओं के साथ मिलिभगत होने के कारण खुलेआम शराब की अवैध बिक्री कराई जा रही है। जिनके द्वारा घर- घर सस्ते दामों में शराब की बिक्री की जा रही है। इनके द्वारा आसानी से सस्ते दामों में शराब मुहैया कराए जाने के कारण ही दिन प्रतिदिन युवाओं में शराब को सेवन बड़ता जा रहा है। इसी प्रकार ही गावों में भी शराब के साथ ही स्मैक, कोकिन, शुल्फ ा गांजा जैसे नशीले पदार्थों की गिरफ त में युवा फ ंसते जा रहे हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा नशे की प्रवृति नशीले इंजेक्शनों की बड़ती जा रही है। जिला उपायुक्त हरीश भारद्वाज द्वारा ग्राम पंचायतों के सरपंचों की मिटिंग करके उनसे नशे पर पूरी तरहे से सहयोग करने की अपील करने के बाद भी ग्राम पंचायतों के सरपंचों का रूचि नशे पर रोक लगाने के प्रति नहीं बन पा रही है। पलवल में अधिकतर अपराधिक वारदातों को अंजाम भी इन्हीं नशीले पदार्थोंं के नशे के सेवन के कारण ही अंजाम दिया जाता है। एसपी पलवल नितिश अग्रवाल व जिला उपायुक्त हरीश कुमार वशिष्ठ द्वारा नशे पर रोक लगाने के प्रयासों को उनके ही विभाग व नागरिकों का सहयोग नहीं मिल पाने के कारण ही कामयाबी नहीं मिल पा रही है।
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