जी.जी.डी. एस.डी. कॉलेज, पलवल के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं कंप्यूटर साइंस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम) का पाँचवाँ एवं अंतिम दिवस उत्साहपूर्वक प्राचार्य डॉ नरेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन संपन्न हुआ। यह पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सदस्य एवं आईक्यूएसी के औद्योगिक विशेषज्ञ राजेंद्र कालरा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण, शोध एवं अकादमिक लेखन की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना था।कार्यक्रम में एक ऑफलाइन तथा दो ऑनलाइन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण एवं शोध के नवीन आयामों की जानकारी प्राप्त की।कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजन सचिव डॉ. रुचि शर्मा द्वारा मुख्य अतिथि एवं संसाधन व्यक्तियों के स्वागत के साथ किया गया। इसके उपरांत कार्यक्रम संयोजिका प्रो. (डॉ.) कांता रानी ने सभी संसाधन व्यक्तियों का परिचय कराते हुए उनके शैक्षणिक एवं शोध क्षेत्र में योगदान से प्रतिभागियों को अवगत कराया।प्रथम ऑफलाइन तकनीकी सत्र में जे.सी. बोस वाईएमसीए यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद गुप्ता ने “उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूलभूत अवधारणाएँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में एआई की भूमिका, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान की संभावनाओं तथा भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही विभिन्न एआई आधारित उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों को शिक्षा एवं शोध में अपनाने के लिए प्रेरित किया तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।इसके उपरांत द्वितीय एवं तृतीय तकनीकी सत्र ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित कर नवीन ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किए।सभी तकनीकी सत्रों के समापन के पश्चात महाविद्यालय के सहायक आचार्य श्री अंकित ने कार्यक्रम के संबंध में फीडबैक दिया । उन्होने पाँचों दिनों के सभी सत्रों की विषयवस्तु, प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा व्यावहारिक उपयोगिता की सराहना करते हुए इस कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक, समसामयिक एवं शिक्षण तथा शोध कार्य के लिए उपयोगी बताया।समापन सत्र में महाविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला बत्रा, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु रानी, रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू, प्राणी विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना कालरा, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजबीर सिंह तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) अधिकारी डॉ. मनीषा अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सभी ने कार्यक्रम की सफलता पर आयोजन समिति को बधाई देते हुए इस प्रकार के शैक्षणिक एवं कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेश कुमार ने सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया तथा पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण, शोध एवं अकादमिक लेखन से संबंधित ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान एवं कौशल को समृद्ध करने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम के सफल संचालन में तकनीकी सहयोग हेतु पवन मुखीजा, गरिमा एवं निखिल का विशेष योगदान रहा। प्रबंध समिति के अध्यक्ष महेंद्र कालडा (एडवोकेट), उपाध्यक्ष मनोज मंगला , सचिव बंशीधर मखीजा, कोषाध्यक्ष निलेश मंगल एवं प्रबंध समिति के अन्य सदस्यों ने कॉलेज प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ़ को बधाई दी और आगे भी ऐसे आयोजन करने के लिए प्रेरित किया।
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