सरकारी कार्यालयों का नाम सुनते ही आम आदमी के मन में अक्सर एक ही तस्वीर उभरती है लंबी कतारें, फाइलों का ढेर, अधिकारियों से मिलने का इंतजार और अंत में एक वाक्य… ‘कल आना’। लेकिन पलवल जिला सचिवालय में उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर की अध्यक्षता में आयोजित समाधान शिविर में जो देखने को मिलता है, वह इस धारणा से बिल्कुल हटकर है। वे फरियादी को मौके पर ही समाधान देने को प्राथमिकता देते हैं।समाधान शिविर में जनसुनवाई शुरू होते ही एक-एक कर विभिन्न गांवों और शहरों से आए लोग अपनी समस्याएं लेकर उपायुक्त डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर के समक्ष पहुंचे। किसी का मामला परिवार पहचान पत्र से संबंधित था, किसी को अपनी पेंशन बनवानी थी, किसी को परिवार पहचान पत्र में आय ठीक करवानी थी, तो कोई सरकारी योजना का लाभ न मिलने की पीड़ा लेकर आया था। हर व्यक्ति के हाथ में एक फरियाद थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा उसके मन में उम्मीद थी कि शायद आज उसकी शिकायत सुनी जाएगी। समाधान शिविर सभागार का माहौल समाधान-केंद्रित दिखाई दिया। उपायुक्त डा. छिल्लर ने समाधान शिविर में अपनी दिव्यांग पेंशन बनवाने से संबंधित शिकायत लेकर आए गांव दीघोट निवासी गोपाल की शिकायत सुनते हुए उसके दस्तावेजों की जांच कर योग्य पाए जाने पर मौके पर ही जिला समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को दिव्यांग पेंशन बनवाने के निर्देश दिए। दिव्यांग पेंशन बनने से गदगद गोपाल ने उपायुक्त और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर समाधान शिविर में प्रत्येक फरियादी की बात पूरे धैर्य और गंभीरता से सुन रहे थे। संबंधित विभागों के अधिकारियों से तत्काल जानकारी ली गई, आवश्यक दस्तावेज देखे गए और जहां संभव था, वहीं मौके पर निर्णय लेकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए गए। जिन मामलों में समय की आवश्यकता थी, उनमें भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करते हुए अधिकारियों को जवाबदेह बनाया गया। सबसे सुखद दृश्य तब देखने को मिला, जब चिंता के साथ समाधान शिविर में प्रवेश करने वाले अनेक नागरिक राहत और संतोष के भाव के साथ बाहर निकले। उनके चेहरों की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि किसी ने उनकी बात केवल सुनी ही नहीं, बल्कि उस पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।प्रशासनिक व्यवस्था की असली परीक्षा वातानुकूलित कार्यालयों में नहीं, बल्कि उन क्षणों में होती है जब एक आम नागरिक अपनी समस्या लेकर किसी अधिकारी के सामने खड़ा होता है। यदि उसे सम्मानपूर्वक सुना जाए, समय पर निर्णय मिले और उसे यह विश्वास हो कि उसकी समस्या पर कार्रवाई होगी, तो यही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान बन जाती है। एक अच्छा प्रशासक केवल आदेश जारी करने वाला अधिकारी नहीं होता, बल्कि वह सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु भी होता है। उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर की कार्यशैली में यही संवेदनशीलता और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पलवल उपायुक्त की कार्यशैली ने साबित कर दिया कि जब जिला प्रशासन सेवा का माध्यम बनता है, तो शासन केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता का विश्वास भी जीत लेता है।
सरकारी दफ्तर की ऐसी कुर्सी, जहां ‘कल आना’ नहीं, बल्कि मौके पर ही किया जाता है शिकायतों का समाधान समाधान
सरकारी कार्यालयों का नाम सुनते ही आम आदमी के मन में अक्सर एक ही तस्वीर उभरती है लंबी कतारें, फाइलों का ढेर, अधिकारियों से मिलने का इंतजार और अंत में एक वाक्य… ‘कल आना’। लेकिन पलवल जिला सचिवालय में उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर की अध्यक्षता में आयोजित समाधान शिविर में जो देखने को मिलता है, वह इस धारणा से बिल्कुल हटकर है। वे फरियादी को मौके पर ही समाधान देने को प्राथमिकता देते हैं।समाधान शिविर में जनसुनवाई शुरू होते ही एक-एक कर विभिन्न गांवों और शहरों से आए लोग अपनी समस्याएं लेकर उपायुक्त डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर के समक्ष पहुंचे। किसी का मामला परिवार पहचान पत्र से संबंधित था, किसी को अपनी पेंशन बनवानी थी, किसी को परिवार पहचान पत्र में आय ठीक करवानी थी, तो कोई सरकारी योजना का लाभ न मिलने की पीड़ा लेकर आया था। हर व्यक्ति के हाथ में एक फरियाद थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा उसके मन में उम्मीद थी कि शायद आज उसकी शिकायत सुनी जाएगी। समाधान शिविर सभागार का माहौल समाधान-केंद्रित दिखाई दिया। उपायुक्त डा. छिल्लर ने समाधान शिविर में अपनी दिव्यांग पेंशन बनवाने से संबंधित शिकायत लेकर आए गांव दीघोट निवासी गोपाल की शिकायत सुनते हुए उसके दस्तावेजों की जांच कर योग्य पाए जाने पर मौके पर ही जिला समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को दिव्यांग पेंशन बनवाने के निर्देश दिए। दिव्यांग पेंशन बनने से गदगद गोपाल ने उपायुक्त और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर समाधान शिविर में प्रत्येक फरियादी की बात पूरे धैर्य और गंभीरता से सुन रहे थे। संबंधित विभागों के अधिकारियों से तत्काल जानकारी ली गई, आवश्यक दस्तावेज देखे गए और जहां संभव था, वहीं मौके पर निर्णय लेकर समस्या के समाधान के निर्देश दिए गए। जिन मामलों में समय की आवश्यकता थी, उनमें भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करते हुए अधिकारियों को जवाबदेह बनाया गया। सबसे सुखद दृश्य तब देखने को मिला, जब चिंता के साथ समाधान शिविर में प्रवेश करने वाले अनेक नागरिक राहत और संतोष के भाव के साथ बाहर निकले। उनके चेहरों की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि किसी ने उनकी बात केवल सुनी ही नहीं, बल्कि उस पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।प्रशासनिक व्यवस्था की असली परीक्षा वातानुकूलित कार्यालयों में नहीं, बल्कि उन क्षणों में होती है जब एक आम नागरिक अपनी समस्या लेकर किसी अधिकारी के सामने खड़ा होता है। यदि उसे सम्मानपूर्वक सुना जाए, समय पर निर्णय मिले और उसे यह विश्वास हो कि उसकी समस्या पर कार्रवाई होगी, तो यही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान बन जाती है। एक अच्छा प्रशासक केवल आदेश जारी करने वाला अधिकारी नहीं होता, बल्कि वह सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु भी होता है। उपायुक्त डा. जयेंद्र सिंह छिल्लर की कार्यशैली में यही संवेदनशीलता और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पलवल उपायुक्त की कार्यशैली ने साबित कर दिया कि जब जिला प्रशासन सेवा का माध्यम बनता है, तो शासन केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता का विश्वास भी जीत लेता है।
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