ब्रज की पावन धरा पर सदियों से चली आ रही धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के वीरवार को होडल उपमंडल के प्राचीन एतहासिक शेषसाई मंदिर पर पहुंचने पर मरौलिया परिवार की ओर से श्रद्धालुओं एवं साधु-संतों का भव्य स्वागत किया गया। परिक्रमा यात्रा के गांव में पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। मरौलिया परिवार के मनोज बंसल, राकेस बंसल, अशोक बंसल, बलराम बंसल, सुभाष बंसल, डेबिड़ बंसल, राजू बंसल ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं तथा श्रद्धालुओं की सेवा-सत्कार में बढ़-चढक़र भाग लिया।ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, आस्था और ब्रज संस्कृति का अनूठा संगम है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में शामिल होकर ब्रजभूमि के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।जानकारी के अनुसार यह पावन यात्रा 8 सितंबर को वृंदावन स्थित मदन मोहन मंदिर से महंत दीनबंधु दास महाराज के सानिध्य में विधिवत रूप से आरंभ हुई थी। यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत, महंत एवं श्रद्धालु शामिल हैं। विभिन्न पड़ावों से होकर गुजरती हुई यह यात्रा जब शेषसाई पहुंची तो स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।
524 वर्षों से चली आ रही परंपराबताया जाता है कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा की यह परंपरा लगभग 524 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। सदियों पुरानी इस धार्मिक परंपरा ने ब्रज की संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रद्धालु इस परिक्रमा में शामिल होते आ रहे हैं।परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु ब्रज के विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचकर दर्शन करते हैं। रास्ते में जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा यात्रियों के लिए जलपान, भोजन और विश्राम आदि की व्यवस्थाएं भी की जाती हैं। इसी परंपरा के तहत शेषसाई में मरौलिया परिवार द्वारा श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
सेवा और श्रद्धा का दिखा संगम
शेषसाई में मरौलिया परिवार की ओर से किए गए स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं के प्रति सेवा और सम्मान की भावना देखने को मिली। परिवार के सदस्यों ने परिक्रमा में शामिल साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण बना रहा और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। मरौलिया परिवार द्वारा प्रत्येक साल इस यात्रा के पहुंचने पर उनके भंड़ारे प्रसाद का आयोजन किया जाता है।परिेक्रमा यात्रा के शेषसाई पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने यात्रा में शामिल संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया और भगवान श्रीकृष्ण से क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का यह पड़ाव एक बार फिर ब्रज की उस गौरवशाली धार्मिक परंपरा का साक्षी बना, जो सैकड़ों वर्षों से श्रद्धा और भक्ति की ज्योति को निरंतर प्रज्वलित किए हुए है।
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