
गुरु और शिष्य के बीच का रिश्ता केवल शिक्षा देने और लेने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर चलने वाला आत्मीय और सम्मान का रिश्ता है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल पलवल में आयोजित गुरु-शिष्य मिलन समारोह में देखने को मिली। पलवल निवासी रिटायर शिक्षिका समाजसेवी शक्तिमणी मंगला द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पलवल, बंचारी, फ रीदाबाद, मथुरा से उनकी पढ़ाई हुई शिष्या इस कार्यक्रम में पहुंची। कार्यक्रम में तुख्य अतिथी आलापुर प्रिसिंपल मोनिका गुप्ता थीं व अध्यक्षता शक्तिमणी मंगला ने की। विशिष्ठ अतिथी डॉक्टर मंजू गोयल,सुषमा रानी गर्ग, बलराम बंसल थे। इस कार्यक्रम में शिक्षक अशोक कुमार, सरोजबाला, अमरवती, मोहनवती, दीप्ति, रजनी शर्मा, नीलम शर्मा, बिमलेश, शिखा गुप्ता, मोनिका गुप्ता, गुलशन ,यास्मीन, तवस्सुम, ऊषा मौजूद थे। कार्यक्रम में गुरुजनों और उनके पुराने शिष्यों का वर्षों बाद मिलन हुआ तो माहौल भावुक हो उठा।समारोह में पहुंचे शिष्यों ने अपने गुरुजनों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। इस दौरान पुराने दिनों की यादें भी ताजा हुईं। गुरुजनों ने अपने शिष्यों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए बदलाव और उपलब्धियों के बारे में जानकारी ली। कई गुरु अपने पुराने शिष्यों को सामने देखकर भावुक नजर आए।मिलन समारोह में गुरुजनों को सम्मानित भी किया गया। शिष्यों ने कहा कि उनके जीवन में जो भी सफलता मिली है, उसमें उनके गुरुजनों के मार्गदर्शन और संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समारोह में मौजूद लोगों ने गुरु-शिष्य के इस आत्मीय मिलन को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
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