बंचारी से सेवली जाने वाली सडक़ की बदहाली ने लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2023 में लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इस सडक़ का निर्माण के कुछ समय बाद ही टूटना विभागीय निगरानी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। सडक़ की हालत देखकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्हें आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस सडक़ के टूटे होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बंचारी गांव के नागरिकों का कहना है कि अनेकों बार इस सडक़ के निर्माण कार्य की जांच कराने की अधिकारियों से मांग करने के बाद भी अधिकारियों व ठेकेदार की मिलिभगत होने के कारण इसकी जांच नहीं करके सरकारी राशि की बंदरबांट करने का कार्य किया गया है।ग्राम सरपंच सीताराम ने सडक़ निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सडक़ का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था, तो इतनी जल्दी इसकी हालत खराब कैसे हो गई? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों का पालन किया गया था और क्या संबंधित अधिकारियों ने कार्य की सही तरीके से निगरानी की थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।सडक़ बनने के कुछ समय बाद ही टूटने से निर्माण कार्य पर खर्च किए गए सरकारी धन के उचित इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरपंच सीताराम ने मांग की है कि सडक़ निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री के नमूनों की जांच कराई जाए, निर्माण कार्य के रिकॉर्ड और गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट की पड़ताल की जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों के लिए सडक़ केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में सडक़ का समय से पहले क्षतिग्रस्त होना लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग सडक़ की वास्तविक स्थिति की जांच कब कराएगा और निर्माण में खामियां मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
BB News 24 www.bbnews24.live