छांयसा गांव में लगातार मौत का तांड़व थमने का नाम नहीं ले पा रहा है। गांव में पिछले आठ दिनों में दो महिलाओं ने और दम तोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों छायंसा गांव में 23 नागरिकों की मृत्यु हुई थी। जिनमें से प्रशासन द्वारा आठ मौतों का कारण हैपिटाईटिस बी व सी बतलाया गया था। 6 मार्च को पलवल जिला उपायुक्त डॉक्टर हरीश कुमार वशिष्ठ व सीएमओ डॉक्टर सतेन्द्र वशिष्ठ ने भी संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्स विभाग की टीमों के द्वारा की गई जांच में शीतल पेय व झोलाछाप ड़ाक्टरों के द्वारा लगाई गई सुईं के कारण इन मरीजों को मृत्यु होने का कारण बतलाया गया था। लेकिन इसके बाद छांयसा गांव में दो महिलााअें की हुई मौत ने प्रशासन के इन दावों की पोल खोलकर कर रख दी है। जिला स्वास्थ्य विभाग की कुम्भकरणीं नींद के कारण ही गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर उचित ध्यान नहीं देने तथा गांव में फ ैल रही मुख्य बिमारी का पता नहीं लगा पाने के कारण ही गांव में पिछले सात दिनों में हुई दो अन्य महिलाओं की मौत से गांव के नागरिकों में गहरा आतंक व्याप्त हो गया हे। छांयसा गांव में 28 फ रबरी को मोना पत्नी शब्बीर(45 साल) व 6 मार्च की रात को अर्शादा पत्नी रमजान(35) साल की बुखार आने पर उनको नल्हड़ अस्पातल में ले जाने पर उनकी ईलाज के दौरान मौत हो गई। इन दोनों को बुखार आने पर उनको ईलाज के लिए नल्हड़ के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया था। लेकिन दोनों की मौत हो जाने पर छांयसा गांव में आतंक फ ैल गया है। गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में नागरिकों की जंाच के दावे किए गए थे। लेकिन वास्तव में पूर गांव के नागरिकों की जांच स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के द्वारा नहीं की गई थी तथा केवल खानापूर्ति करके पिछले दिनों मौत का सिलसिला बंद होने पर जांच की कार्रवाही को भी बंद कर दिया गया था। जांच एजेंसीयों के दावे हुए फ ेल: जिला उपायुक्त द्वारा स्वास्थ्य विभाग की ढनसीडीसी तथा पुर्ण और चेन्नई से आई विशेषज्ञ टीमों द्वारा गांव में पिछले दिनों हुई आठ मौतों का कारण सिरींज व लाल रंग के पेय पदार्थ बताए गए थे। जबकि अन्य स्थानों पर भी पेय पदार्थों की भारी बिक्री हो रही है, लेकिन किसी अन्य गांव में इनके कारण इस प्रकार से भारी संचया में हुई मौतों के मामले सामने नहीं आए हैं। ऐसा लगता है कि छांयसा गांव में पहले हुई मौतों के कारणों की सही जानकारी का पता लगाने में स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरी तरह से फ ेल हो गईं थीं या फि र इनके द्वारा केवल कागजी कार्रवाही को पूरा करके आपने कार्य को अंजाम दे दिया गया था। अगर हरियाणा सरकार व स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जल्द ही स्थिती को नहीं संभाला तो स्थिती बद से बदतर हो सकती है तथा अनेकों अन्य ग्रामीणों की इस बिमारी की चपेट में आने से मृत्यु हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों जिला सिविल सर्जन डॉक्टर सत्येन्द्र वशिष्ठ से इस संदर्भ में बात करने के लिए मोबाईल पर सम्पर्क करने पर उनके द्वारा मोबाईल नहीं उठाने के कारण सम्पर्क नहीं हो पाया है।
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