पेंशन खैरात नहीं, पेंशन हमारा अधिकार है : पेंशनर्स फेडरेशन

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी पेंशनर्स फेडरेशन  के आह्वान पर देशभर के पेंशनभोगी, पारिवारिक पेंशनभोगी तथा वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर आज 29 सितंबर को जिला मुख्यालय पलवल पर 24 घंटे का पड़ाव/धरना शुरू किया।पड़ाव में रिटायर्ड कर्मचारीयों ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए तथा उनके साथ किए गए वादों को लागू किया जाए।कार्यक्रम में 80 वर्ष की आयु से ऊपर के कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व शॉल भेंट करके सम्मानित किया गया।
   रिटायर्ड कर्मचारी संघ के नेता जवाहर सिंह रावत व बलजीत शास्त्री की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरिचंद वर्मा ने किया। रिआटयर्ड कर्मचारी संघ के नेता बलजीत शास्त्री व महेंद्रसिंह चौहान ने कहा कि 31 दिसंबर 2025 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के बीच किए जा रहे भेदभाव से पेंशनभोगियों में भारी रोष है।आठवें वेतन आयोग के लाभ से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वंचित किए जाने की आशंका को समाप्त करते हुए उन्हें भी आठवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए।नेताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत का सीधा असर उनके जीवन पर पड़ता है, इसलिए पेंशन को सम्मानजनक जीवन की सुरक्षा के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि पेंशन नियम 2025 को वापस लिया जाए तथा आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण को शामिल किया जाए।उन्होंने मांग की कि कम्यूटेशन की अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष     किया जाए।यूनियन नेता जवाहर सिंह रावत व रामआश्रे ने कहा कि NPS/UPS को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए तथा 18 माह के लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान  किया जाए और वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे एवं हवाई यात्रा में पूर्व में मिलने वाली रियायतें बहाल करने की मांग की है।साथ ही पेंशनभोगियों एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुविधाओं में सुधार तथा 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन को 70 वर्ष की आयु से लागू करने की मांग रखी गई है। उन्होंने कहा कि 29-30 सितंबर का 24 घंटे का पड़ाव/धरना आंदोलन के प्रथम चरण के रूप में आयोजित किया गया है लेकिन जब तक सरकार पेंशनभोगियों की जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।कार्यक्रम में उदयसिंह,दरियाब सिंह,ताराचंद,गोविन्दराम,रमणलाल,देवेन्द्र नंबरदार, धर्मचंद,दिनेश शर्मा,नेमचंद शर्मा व रमेशचंद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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