अखिल भारतीय किसान सभा की होडल ब्लॉक की बैठक सती सरोवर पर सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता होडल ब्लॉक के प्रधान देवेंद्र नंबरदार की व संचालन सचिव देवीराम बंचारी ने किया। इस अवसर पर किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए किसान यूनियन के जिला सचिव दरियाब सिंह और भगीरथ बैनीवाल ने बताया कि किसान मजदूर संगठन हाल ही में हुई भारत अमेरिका ट्रेड डील का विरोध करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के किसानों के बीच कहीं भी समानता नहीं है। अमेरिका में केवल 8 हज़ार के लगभग कपास उत्पादक किसान हैं जबकि भारत में 98 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसान हैं इसके साथ ही अमेरिका अपने किसानों को सालाना 60 लाख रुपए सब्सिडी देता है जबकि भारत अपने किसानों को केवल 6 हज़ार रुपए सालाना सब्सिडी देता है। उन्होंने कहा, बीते अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर में भारत ने अमेरिका से कपास के आयात पर शुल्क को 11 प्रतिशत से शून्य कर दिया था। इन तीन महीने में कपास की 30 लाख गांठ आयात की गई, जोकि ज़रूरत से कहीं अधिक है। आपूर्ति अधिक होने से भारतीय कपास उत्पादक किसानों को 1000 से 1500 रुपये कम दाम मिले। ये सिर्फ तीन महीने की बात है। आगे क्या होगा इससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। ताजे फल, दूध , तिलहन और अनाज सहित अन्य फसलों के आयात करने से किसान तबाह हो जाएगा जबकि किसान पहले से ही घाटे में है। जीएम खाद्य पदार्थों और जीएम बीजों के आयात को खुली छूट मिलने से प्राकृतिक उर्वरता नष्ट होगी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 12 फ़रवरी को कर्मचारी किसान और मज़दूरों की हड़ताल का पूर्णरूप से समर्थन करते हैं एवं किसानों को जागरूक करने के लिए होडल ब्लॉक के सभी गांव में ग्राम कमेटी बनाई जाएगी। बैठक में टीकाराम बेड़ा, रमन लाल पंखिया, बच्चू सिंह, महेंद्र सौरोत, प्रताप सिंह और भूपराम सहित काफ़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
अखिल भारतीय किसान सभा ने किया 12 फ़रवरी की राष्ट्रीय हड़ताल का समर्थन
अखिल भारतीय किसान सभा की होडल ब्लॉक की बैठक सती सरोवर पर सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता होडल ब्लॉक के प्रधान देवेंद्र नंबरदार की व संचालन सचिव देवीराम बंचारी ने किया। इस अवसर पर किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए किसान यूनियन के जिला सचिव दरियाब सिंह और भगीरथ बैनीवाल ने बताया कि किसान मजदूर संगठन हाल ही में हुई भारत अमेरिका ट्रेड डील का विरोध करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के किसानों के बीच कहीं भी समानता नहीं है। अमेरिका में केवल 8 हज़ार के लगभग कपास उत्पादक किसान हैं जबकि भारत में 98 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसान हैं इसके साथ ही अमेरिका अपने किसानों को सालाना 60 लाख रुपए सब्सिडी देता है जबकि भारत अपने किसानों को केवल 6 हज़ार रुपए सालाना सब्सिडी देता है। उन्होंने कहा, बीते अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर में भारत ने अमेरिका से कपास के आयात पर शुल्क को 11 प्रतिशत से शून्य कर दिया था। इन तीन महीने में कपास की 30 लाख गांठ आयात की गई, जोकि ज़रूरत से कहीं अधिक है। आपूर्ति अधिक होने से भारतीय कपास उत्पादक किसानों को 1000 से 1500 रुपये कम दाम मिले। ये सिर्फ तीन महीने की बात है। आगे क्या होगा इससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। ताजे फल, दूध , तिलहन और अनाज सहित अन्य फसलों के आयात करने से किसान तबाह हो जाएगा जबकि किसान पहले से ही घाटे में है। जीएम खाद्य पदार्थों और जीएम बीजों के आयात को खुली छूट मिलने से प्राकृतिक उर्वरता नष्ट होगी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 12 फ़रवरी को कर्मचारी किसान और मज़दूरों की हड़ताल का पूर्णरूप से समर्थन करते हैं एवं किसानों को जागरूक करने के लिए होडल ब्लॉक के सभी गांव में ग्राम कमेटी बनाई जाएगी। बैठक में टीकाराम बेड़ा, रमन लाल पंखिया, बच्चू सिंह, महेंद्र सौरोत, प्रताप सिंह और भूपराम सहित काफ़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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